भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग केंद्र (CBME) ने ‘हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी’ में एक विशेष मास्टर ऑफ साइंस (रिसर्च) कार्यक्रम शुरू किया है। जनवरी 2025 में शुरू होने वाला यह नया कार्यक्रम विशेष रूप से चिकित्सा और संबद्ध नैदानिक पेशेवरों के लिए डिजाइन किया गया है। यह चिकित्सा के सिद्धांतों को इंजीनियरिंग विषयों के साथ एकीकृत करता है, जिससे स्वास्थ्य सेवा में गहन तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा मिलता है। इच्छुक और पात्र लोग आधिकारिक वेबसाइट (ecampus.iitd.ac.in/PGADM/login) पर 25 अक्तूबर तक आवेदन कर सकते हैं।
आईआईटी दिल्ली में अनुसंधान एवं विकास के डीन तथा चिकित्सा उपकरण विशेषज्ञ प्रोफेसर नरेश भटनागर ने बताया कि यह कार्यक्रम कई राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप है तथा इसे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भारत के उद्देश्यों और प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है।
इस कोर्स के फायदे
- इस कार्यक्रम को मुख्य विषयों और प्रयोगशाला पाठ्यक्रमों के साथ डिजाइन किया गया है, ताकि स्वास्थ्य सेवा उद्योग द्वारा अपेक्षित कौशल प्रदान किया जा सके, साथ ही उच्च अध्ययन के लिए या उद्योग और नैदानिक प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा सके।
- प्रतिभागियों को उच्च-मूल्य वाली फेलोशिप और पारिश्रमिक द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जो प्रवेश स्तर के पदों पर चिकित्सा और संबद्ध विषय स्नातकों के लिए उपलब्ध वेतन और वजीफे के बराबर है।
- प्रतिभागियों को आईआईटी दिल्ली में पीएचडी करने के लिए एक सहज संक्रमण की पेशकश भी की जाएगी, जो कि बायोमेडिकल क्षेत्र में दीर्घकालिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
आईआईटी दिल्ली में सीबीएमई की प्रमुख प्रोफेसर नीतू सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम चिकित्सा और संबद्ध पेशेवरों के लिए स्वतंत्र शोधकर्ता बनने के लिए आवश्यक स्नातक, मास्टर और डॉक्टरेट डिग्री के बीच के अंतर को भरने के लिए बहुत जरूरी इंटरमीडिएट डिग्री और प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा, “यह चिकित्सा और संबद्ध स्नातकों को अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए लाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से, आईआईटी दिल्ली वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी मानव संसाधन तैयार करने की कल्पना करता है जो न केवल स्टार्ट-अप संस्कृति और औद्योगिक उत्पादन को बढ़ा सकता है बल्कि बायोमेडिकल विज्ञान और इंजीनियरिंग से संबंधित उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक अनुसंधान को भी बढ़ावा देगा।”