योगी सरकार ने पूर्वांचल के किसानों की आय बढ़ाने के लिए मखाना की खेती को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से 14 जिलों में मखाना की खेती के लिए अनुदान की योजना शुरू की जा रही है, जिसके तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना और उन्हें एक नई फसल का विकल्प देना है, जो पानी से भरे खेतों में की जाती है।
देवरिया में मखाना खेती का सफल प्रयोग
गोरखपुर मंडल के देवरिया जिले में मखाना की खेती का प्रयोग पिछले साल शुरू हुआ और इस साल यह पूरी तरह सफल साबित हो चुका है। देवरिया के प्रगतिशील किसान और मत्स्यपालक दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र से बीज लाकर मखाना की खेती कर रहे हैं। इस साल यहां 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मखाना की फसल तैयार हो चुकी है। देवरिया अब पूर्वांचल का पहला जिला बन गया है, जिसने मखाना की खेती को अपनाया है।
अन्य जिलों में भी मखाना खेती का विस्तार
देवरिया की सफलता के बाद अब गोरखपुर मंडल के अन्य जिलों में भी मखाना की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कुशीनगर जिले में 13 हेक्टेयर और गोरखपुर जिले में 10 हेक्टेयर भूमि में मखाना की खेती का लक्ष्य रखा गया है। गोरखपुर के लिए अनुसूचित जाति के किसानों को 2 हेक्टेयर और सामान्य वर्ग के किसानों को 8 हेक्टेयर क्षेत्रफल आवंटित किया गया है। वहीं, महराजगंज जिले में 10 हेक्टेयर भूमि पर मखाना की खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें पहले साल 25 किसान जुड़ने की उम्मीद है।
किसानों के लिए सुनहरा मौका: लागत का 40% अनुदान से कवर
मखाना की खेती के लिए एक हेक्टेयर भूमि पर लगभग 1 लाख रुपये की लागत आती है। सरकार द्वारा दिए जा रहे 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान से किसानों की 40% लागत की भरपाई हो जाएगी। इसके अलावा, मखाना की पैदावार भी आकर्षक है। प्रति हेक्टेयर औसतन 25-29 क्विंटल मखाना उत्पादन हो सकता है, जिसका थोक बाजार में मूल्य 1000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है।
मखाना की खेती का समय और प्रक्रिया
मखाना की खेती तालाब या पानी भरे खेतों में की जाती है। इसकी नर्सरी नवंबर में लगाई जाती है, और फरवरी-मार्च में रोपाई होती है। इसके बाद, करीब 10 महीने में फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है। यह खेती खासकर उन किसानों के लिए लाभदायक है, जिनके पास पहले से निजी तालाब हैं और जो मछली पालन करते हैं।
सुपरफूड के रूप में मखाना की बढ़ती मांग
मखाना को अब सुपरफूड के रूप में पहचान मिल रही है। कोरोना के बाद से स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने इसकी मांग को और बढ़ा दिया है। पोषक तत्वों से भरपूर मखाना में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और फॉस्फोरस की उच्च मात्रा पाई जाती है। यह न केवल पाचन तंत्र को मजबूत करता है, बल्कि हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित करने में भी सहायक है।
योगी सरकार की इस पहल से उम्मीद है कि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और मखाना की खेती एक महत्वपूर्ण फसल के रूप में उभरेगी।